विमुद्रीकरण की आड़ में गांववालों का शोषण करते बैंक 

किसी की अपनी दर्द भारी दास्ताँ है तो किसी को अपनों को खोने का कभी ना मिटने वाला दर्द। विमुद्रीकरण के बुरे प्रभाव की ख़बरें देश के हर छोटे बड़े इलाकों में देखने और सुनने को मिली है।



दलित जीवन की झाँकी है तुलसीराम की ‘मुर्दहिया’

दलित ग्रंथ होने के साथ-साथ यह बाल मन को समझने के लिए भी आवश्यक है। जो लोग ‘चिल्ड्रन इन डिफ़िकल्ट सर्कम्स्टैन्सेज़’ पर काम करते हैं, उनके लिए यह पढ़ना आवश्यक है…लिखते हैं अंकित झा।