Hegemony Redefined in Indian State

While celebrating the birthday of my Anarchist friend, I came across a news that KG Suresh,  one of the leading Right-Wing intelligentsia of the nation has been appointed the Director-general of the Indian Institute of Mass Communication. What does that mean? It means that we are entering into a redefined strcuture of Ideological hegemony in […]



कुछ अच्छे दिन मिल भी जाए तो क्या? मोदी, परिवर्तन और प्रश्न।

समाज देखिये हमारा. ख्यालों, सवालों, इरादों, मिसालों से पूर्णतया भरपूर. ख्वाइश और जरुरत में अंतर ज्ञात पता है किसी को? वही फर्क जो मई के पूर्व के अच्छे दिन और आज के समय के अच्छे दिनों में है. पहले ख्वाइश थी, अब जरुरत बन गयी. किसी शायर के इश्क के ख्वाइश से परे, किसी कवि […]



क्या व्यापमं मामा की राजनीति पे भारी पड़ेगा?

ये घोटाला कतई 2G व सीडब्लूजी जैसा नहीं है, इसमें करोड़ों की गड़बड़ी नहीं है परन्तु ये उन सभी से वीभत्स तथा खतरनाक है. इस गड़बड़ी में देश के भविष्य के साथ छेड़खानी की गयी, देश के प्रतिभा के साथ धोखा किया गया, बुद्धि, विवेक व शिक्षा प्रणाली के आँखों में धुल झोंका गया.