दलित जीवन की झाँकी है तुलसीराम की ‘मुर्दहिया’

दलित ग्रंथ होने के साथ-साथ यह बाल मन को समझने के लिए भी आवश्यक है। जो लोग ‘चिल्ड्रन इन डिफ़िकल्ट सर्कम्स्टैन्सेज़’ पर काम करते हैं, उनके लिए यह पढ़ना आवश्यक है…लिखते हैं अंकित झा।