कुछ अच्छे दिन मिल भी जाए तो क्या? मोदी, परिवर्तन और प्रश्न।

समाज देखिये हमारा. ख्यालों, सवालों, इरादों, मिसालों से पूर्णतया भरपूर. ख्वाइश और जरुरत में अंतर ज्ञात पता है किसी को? वही फर्क जो मई के पूर्व के अच्छे दिन और आज के समय के अच्छे दिनों में है. पहले ख्वाइश थी, अब जरुरत बन गयी. किसी शायर के इश्क के ख्वाइश से परे, किसी कवि […]